प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत बीजेपी के लिए झटका और आरजेडी के लिए क्यों है ख़तरे की घंटी
Updated on
04-08-2026 03:49 PM
बिहार के बांकीपुर के बहुचर्चित उप चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की है.
यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्य सभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी. पटना के शहरी क्षेत्र में आने वाली यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है लेकिन इस बार के नतीजों ने बड़े उलटफेर का संकेत दिया है.
प्रशांत किशोऱ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के नीरज कुमार को 19,324 वोट से हरा दिया. उन्हें 64,151 वोट (49.2%) मिले जबकि नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं.
नौ महीने पहले ही बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 243 सीटों में 202 पर जीत दर्ज की थी. बांकीपुर को बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट समझा जाता रहा है. जबकि उन चुनावों में जनसुराज पार्टी का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत सका था.
कई विश्लेषक बहुत कम वोटर टर्नआउट को भी इसकी वजह मान रहे हैं, हालांकि बीजेपी ने हार के पीछे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वोटों का प्रशांत किशोर को ट्रांसफ़र होने को एक बड़ी वजह बताया है.
जबकी आरजेडी सांसद मीसा भारती ने प्रशांत किशोर की जीत को 'बीजेपी की ही जीत' बताया है.
अपनी हार के लिए बीजेपी ने क्या कारण गिनाए
बीजेपी का कहना है कि बांकीपुर के उप चुनाव में आरजेडी का जनाधार अधिक खिसका है.
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, "2025 विधानसभा चुनाव में 41.1% मतदान हुआ था जिसमें बीजेपी को 63.25% और राजद को 29.83% वोट मिले थे."
"लेकिन इस उपचुनाव में मतदान 8% प्रतिशत कम होकर 33.3% रह गया. इसमें बीजेपी को 34.4% वोट मिले, राजद को 10.95%, जबकि जन सुराज को 49.23% वोट मिले."
उन्होंने लिखा, "2025 की तुलना में बीजेपी अपने 54% से अधिक वोट शेयर को बचाने में सफल रही, जबकि आरजेडी अपने पुराने वोट शेयर का सिर्फ़ 37% ही बचा पाई. बीजेपी के वोट शेयर में 45.6% की गिरावट आई, जबकि राजद के वोट शेयर में 63.3% की भारी गिरावट दर्ज हुई. यानी, आरजेडी का जनाधार बीजेपी की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से खिसका."
उन्होंने दावा किया कि 'आरजेडी का एक बड़ा पारंपरिक वोट बैंक जन सुराज की ओर स्थानांतरित हुआ. तेजस्वी यादव की चुनावी अभियान से दूरी ने भी इसमें भूमिका निभाई.'
अमित मालवीय ने स्वीकार किया कि 'कम मतदान की वजह ये रही कि बीजेपी समर्थक मतदान केंद्र तक नहीं पहुँचे.'
अमित मालवीय ने बांकीपुर के नतीजे को आरजेडी के चेतावनी बताया है.
उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा, "बांकीपुर में जो हुआ, वह आरजेडी के लिए चेतावनी है. बीजेपी को हराने के प्रयास में अगर उसके वोट जन सुराज पार्टी की ओर स्थानांतरित हुए हैं, तो इतिहास बताता है कि ऐसी रणनीति अक्सर मुख्य प्रतिद्वंद्वी से अधिक उस दल को ही कमजोर कर देती है, जो अपनी राजनीतिक ज़मीन छोड़ता है."
अमित मालवीय ने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए लिखा, "पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने वामपंथ को हराने के लिए 2011 में तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक जगह छोड़ी. नतीजा यह हुआ कि तृणमूल मज़बूत होती गई और कांग्रेस हाशिये पर चली गई. दिल्ली में भी कांग्रेस ने वही गलती दोहराई. भाजपा को रोकने के नाम पर उसने आम आदमी पार्टी के लिए जगह बनाई और अंततः उसका वोट शेयर लगभग 2% तक सिमट गया."
उधर, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बांकीपुर की जीत को 'बीजेपी के विरोध और लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत' बताया है. उन्होंने विजेता को बधाई दी और उनके जन समर्पित कार्यकाल और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे से ये फिर से साबित हो गया कि " जीत उसकी ज़रूर होती है , जो लगातार लड़ता है , जनता से जिसका निरंतर जुड़ाव होता है, जो कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का सम्मान करता है और उनके साथ संपर्क और संवाद कायम रखता है."
हालांकि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में 'अपर कास्ट' की ख़ासी मौजूदगी है और यहां से बीजेपी के नितिन नबीन पांच बार से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं. ऐसे में यहां से हार बीजेपी के लिए भी एक ख़तरे की घंटी है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, "राजनीतिक दलों के पास उपलब्ध जाति और समुदाय आधारित अनुमानों के मुताबिक़, बांकीपुर में कायस्थ 14%, भूमिहार 8%, ब्राह्मण 8%, राजपूत 7%, कुर्मी 5%, कुशवाहा 3%, मुस्लिम 12%, कहार 9% (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), बनिया 9% और अनुसूचित जाति 9% हैं."
"हालांकि ये केवल स्थानीय राजनीतिक दलों के अनुमान हैं, फिर भी वे यह संकेत देते हैं कि बांकीपुर में कथित 'सवर्ण' आबादी का अनुपात लगभग 37% तक हो सकता है. इसमें बनिया समुदाय को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि बिहार में उन्हें ओबीसी का दर्जा है."
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