कोयला मजदूरों के 12वें वेतन समझौते का बदलेगा पूरा ढांचा: जेबीसीसीआई की जगह अब बनेगी नेगोसिएशन काउंसिल
Updated on
07-08-2026 02:12 PM
कोयला उद्योग में प्रस्तावित 12 वें वेतन समझौते की प्रक्रिया इस बार पूरी तरह बदले हुए स्वरूप में होगी। नए श्रम कानून लागू होने के बाद अब वेतन निर्धारण के लिए वर्षों से चली आ रही संयुक्त द्विपक्षीय कोयला उद्योग समिति (जेबीसीसीआई) का गठन नहीं होगा। इसकी जगह नेगोसिएशन काउंसिल (वार्ताकार परिषद) बनाई जाएगी, जिसमें केवल निर्धारित समर्थन हासिल करने वाली ट्रेड यूनियनों को ही प्रतिनिधित्व मिलेगा।
कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) के महासचिव नाथूलाल पांडे ने गुरुवार को कोरबा प्रवास के दौरान बताया कि नई व्यवस्था के तहत किसी ट्रेड यूनियन को नेगोसिएशन काउंसिल में शामिल होने के लिए कम से कम 20 प्रतिशत श्रमिकों का समर्थन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इससे कम समर्थन पाने वाली यूनियन वेतन समझौते की वार्ता प्रक्रिया से बाहर रहेगी।
20 से 39 प्रतिशत समर्थन मिलने पर एक प्रतिनिधि और 40 से 50 प्रतिशत तक समर्थन मिलने पर दो प्रतिनिधियों को काउंसिल में स्थान मिलेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानून के स्थान पर चार श्रम संहिताएं लागू की हैं। इनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता शामिल हैं। इन्हीं प्रावधानों के तहत कोयला उद्योग में वेतन निर्धारण की व्यवस्था भी बदली गई है।
पांडे ने बताया कि फिलहाल कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में ट्रेड यूनियनों का सदस्यता सत्यापन चल रहा है। प्रत्येक कर्मचारी केवल एक ही ट्रेड यूनियन का सदस्य बन सकेगा। 25 सितंबर तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदान कराया जाएगा, इसके आधार पर प्रत्येक यूनियन को मिले समर्थन का प्रतिशत तय होगा।
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